जस्टिस वर्मा की सुप्रीम कोर्ट में याचिका
नई दिल्ली (वी.एन.झा)। केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने शुक्रवार को कहा कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश यशवंत वर्मा के खिलाफ संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाना पूरी तरह से सांसदों का मामला है और सरकार इसमें कहीं भी शामिल नहीं है। मेघवाल ने बताया कि न्यायमूर्ति वर्मा के खिलाफ आरोपों की जांच के लिए तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना द्वारा गठित आंतरिक समिति ने अपनी रिपोर्ट पहले ही सौंप दी है। मंत्री ने कहा कि अगर न्यायमूर्ति वर्मा रिपोर्ट से सहमत नहीं हैं और सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते जो उनका विशेषाधिकार है। उन्होंने कहा कि संसद को सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के न्यायाधीश को हटाने का अधिकार है। उन्होंने कहा कि किसी न्यायाधीश के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पारित करने के लिए लोकसभा में कम से कम 100 और राज्यसभा में 50 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है। न्यायामूर्ति वर्मा को हटाने को लेकर शुरू हुई प्रक्रिया पर मेघवाल ने कहा कि यह पूरी तरह से सांसदों का मामला है, उन्होंने कुछ प्रयास किए हैं। सरकार इसमें शामिल नहीं है। इस बीच न्यायमूर्ति वर्मा ने आंतरिक जांच समिति द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट को अमान्य ठहराने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। वर्मा ने तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश खन्ना द्वारा उन्हें पद से हटाने की 8 मई की सिफारिश को रद्द करने की मांग की है। सरकार 21 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र में न्यायमूर्ति वर्मा को हटाने के लिए प्रस्ताव लाने पर जोर दे रही है। कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा है कि उनकी पार्टी के सांसद भी प्रस्ताव पर हस्ताक्षर करेंगे।

