नई दिल्ली। भारत निर्वाचन आयोग ने शुद्ध मतदाता सूचियों को लोकतंत्र की आधारशिला बताते हुए, बूथ लेवल अधिकारियों (बीएलओ) और अन्य चुनाव कर्मियों के वेतन में महत्वपूर्ण वृद्धि की घोषणा की है। आयोग ने 2 अगस्त 2025 को जारी एक प्रेस नोट में बताया कि यह निर्णय उन कर्मियों को पर्याप्त मुआवजा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो सटीक मतदाता सूची बनाए रखने और चुनावी प्रक्रिया को मजबूत करने के लिए अथक परिश्रम करते हैं। यह संशोधन वर्ष 2015 के बाद पहली बार किया गया है। इसके साथ ही, निर्वाचन आयोग ने पहली बार निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ईआरओ) और सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (एईआरओ) के लिए भी मानदेय प्रदान करने का निर्णय लिया है। मानदेय में महत्वपूर्ण बढ़ोतरी का विवरणः-बूथ लेवल अधिकारी (बीएलओ): बीएलओ का वार्षिक पारिश्रमिक 6,000 रुपये से दोगुना कर 12,000 रुपये कर दिया गया है । मतदाता सूची के पुनरीक्षण के लिए प्रोत्साहन राशि: बीएलओ को मिलने वाली यह राशि 1,000 रुपये से बढ़ाकर 2,000 रुपये कर दी गई है । बीएलओ पर्यवेक्षक: इनका मानदेय 12,000 रुपये से बढ़ाकर 18,000 रुपये किया गया है । सहायक निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (एईआरओ): इन्हें पहली बार 25,000 रुपये का मानदेय दिया जाएगा । निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (ईआरओ): इन्हें भी पहली बार 30,000 रुपये का मानदेय मिलेगा । इसके अलावा, आयोग ने बिहार में शुरू होने वाले विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के लिए बीएलओ हेतु 6,000 रुपये के विशेष प्रोत्साहन को भी मंजूरी दी है । आयोग का यह कदम चुनाव कर्मियों के मनोबल को बढ़ाने और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी तथा कुशल बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।

