नई दिल्ली। दिल्ली विधानसभा में ‘फांसी घर’ के मामले पर गुरुवार को स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि पूरे मामले की गहन जांच दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति करेगी. दिल्ली के तत्कालीन सीएम अरविंद केजरीवाल, मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया और तत्कालीन स्पीकर राम निवास गोयल को समन करके पूछताछ करेगी.दिल्ली विधानसभा के स्पीकर विजेंद्र गुप्ता ने फैसला सुनाते हुए कहा कि दिल्ली विधानसभा में लगे फांसी घर का शिलालेख हटाया जाएगा. साथ ही नेशनल आर्काइव्स, ICHR, IGNCA के विशेषज्ञों की राय में सामने आया था कि इमारत के जिस हिस्से का शिलान्यास आप सरकार ने 9 अगस्त 2022 को फांसी घर के रूप में किया था वो असल में टिफ़िन रूम और लिफ्ट थी. पिछले तीन दिनों तक विधानसभा में फांसी घर के मुद्दे पर चर्चा होने के बाद विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि परिसर में फर्ज़ी फांसी घर पर करोड़ों रुपए खर्च किए गए, तीन दिनों में भी विपक्ष की तरफ से कोई पुख्ता सबूत नहीं मिला. इस मुद्दे पर राष्ट्रीय अभिलेखागार से प्राप्त रिकॉर्ड, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की जांच और डीयू, जेएनयू के इतिहासकारों से हुई मीटिंग का हवाला देकर विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि सदन इस निष्कर्ष पर पहुंचा है कि यहां ना तो कोई फांसी घर था ना ही कोई सुरंग था. विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि अगस्त 2022 में जब यह फांसी घर बनाया गया तो विपक्ष के सभी सदस्यों के भावना देशभक्ति से जुड़ गई और हमें भी लगा की फांसी जैसी घटना हुई होगी. हमें यह सुनकर ऊर्जा मिलती थी कि यह हमारा शहादत स्थल है. लेकिन फिर पदभार संभालने के बाद इतिहास खंगालने और राष्ट्रीय अभिलेखागार द्वारा प्राप्त दस्तावेज के आधार पर पता चला कि यहां कोई फांसी घर थी ही नहीं. इस घटना से भावनाओं को ठेस पहुंची.

