- मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में जिला विकास अधिकारियों और जिला ग्राम विकास एजेंसी के निदेशकों का एक दिवसीय संयुक्त सम्मेलन
- गांव की भूमि को आरक्षित करने और भूखंड आवंटन की प्रक्रिया को और भी आसान एवं पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया
गांधीनगर
मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विजन ‘विकसित भारत@2047’ को ग्राम स्तर तक साकार करने में जिला विकास अधिकारियों की भूमिका को महत्वपूर्ण एवं बुनियादी बताया है। इस संबंध में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने ग्रामोत्थान के माध्यम से विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने के लिए गांवों को अत्याधुनिक सुविधाओं प्रदान कर उनको तेज गति से विकास की पंक्ति में शामिल करने का संकल्प किया है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि इसके लिए यह आवश्यक है कि जिला विकास अधिकारियों की युवा टीम ग्रामीण और गरीब जरूरतमंद लोगों तक आजीविका, आवास, आयुष्मान भारत के जरिए स्वास्थ्य सेवाएं, शौचालय और स्वच्छता जैसी अनेक जन कल्याणाकारी योजनाएं पहुंचाने के लिए सेवा भाव के साथ नेतृत्व करें मुख्यमंत्री ने यह बात गुरुवार को गांधीनगर में आयोजित जिला विकास अधिकारियों और जिला ग्राम विकास एजेंसियों के निदेशकों के संयुक्त सम्मेलन की अध्यक्षता करते हुए कही। सम्मेलन में ग्राम विकास मंत्री राघवजी पटेल और मुख्य सचिव पंकज जोशी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने इस सम्मेलन में ‘गाम तळ नीम’ करने (गांव की भूमि को विशेष उद्देश्य के लिए आरक्षित करना) की प्रक्रिया को ऑनलाइन बनाने के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म को लॉन्च किया। इस संबंध में उन्होंने कहा कि इस प्लेटफॉर्म के कार्यरत होने से ग्रामीण क्षेत्रों में भूखंड आवंटन की प्रक्रिया और भी आसान और पारदर्शी होने के कारण आवास निर्माण योजनाओं के लक्ष्य हासिल किए जा सकेंगे। इतना ही नहीं, प्रधानमंत्री आवास योजना के अंतर्गत ग्रामीण स्तर पर और अधिक आवासों का निर्माण होने से सभी के सिर पर पक्की छत की प्रधानमंत्री की मंशा भी साकार होगी मुख्यमंत्री ने जिला विकास अधिकारियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि उन्हें ग्रामीण जनजीवन में गुणात्मक बदलाव लाने वाली कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की बड़ी जिम्मेदारी के साथ-साथ उन योजनाओं को सफल बनाने का अवसर मिला है। इस अवसर को जनसेवा और अंत्योदय उत्थान के ईश्वरीय अवसर के रूप में स्वीकार कर पूरी कर्तव्यपरायणता के साथ अपने कर्तव्यों और दायित्वों के निर्वहन करने का संतोष प्राप्त किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने सख्ती से कहा कि गलत व्यवहार करने वालों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा, साथ ही उन्होंने अनुरोध किया कि हमेशा वचन, कर्म और आचरण, तीनों एक समान रखकर जनहित में काम करते हुए सरकारी सेवा को गौरवान्वित करने का भाव दिल में रखें। मुख्यमंत्री ने कहा कि टेक्नोलॉजी के आज के दौर में सरकारी सेवाएं जवाबदेह बन गई हैं। इतना ही नहीं, लोगों की जागरूकता भी बढ़ गई है, तब योजनाओं की क्रियान्वयन टीम के प्रमुख के रूप में जिला विकास अधिकारियों को गुणवत्तापूर्ण कार्य, समयबद्ध आयोजन और लोगों की अपेक्षाओं की कसौटी पर खरा उतरना होगा।
उन्होंने यह भी कहा, “लोगों के काम सरलता और शीघ्रता से हों, इस बात का अधिकतम ध्यान रखते हुए आपको ऐसी स्पष्टता के साथ कार्यरत रहना होगा जिसमें सत्ता का सतर्कता के साथ जनसेवा में सदुपयोग हो सके।” मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में ग्रामीण विकास सहित तमाम विकास कार्यों के लिए धन की कोई समस्या नहीं है और राज्य आर्थिक रूप से समृद्ध है, ऐसे में जिला विकास अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना होगा कि विकास का लाभ अंतिम छोर तक सौ फीसदी पहुंचे। जिला विकास अधिकारियों की युवा टीम को प्रोत्साहन और प्रेरणा देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित भारत का संकल्प इस युवा टीम के सहयोग और साथ से ही पूरा होना है, जिन्हें सरकारी सेवाओं में अभी लंबा सफर तय करना है। इसके लिए उन्होंने नए विचारों के साथ जनहित की योजनाओं को साकार करने के लिए वर्तमान स्थिति से और तेज गति से आगे बढ़कर सेवारत रहने का आह्वान किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने राज्य के पंचायत विभाग की विभिन्न योजनाओं की आसान भाषा में जानकारी देने वाली पुस्तिका और स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट के पहले न्यूज लेटर का विमोचन भी किया। ग्राम विकास मंत्री राघवजी पटेल ने कहा कि हम सभी साथ मिलकर प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत’ के स्वप्न को ‘विकसित गुजरात’ के जरिए साकार करें। प्रधानमंत्री की फ्लैगशिप योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन से गुजरात के गांवों में सच्चे अर्थ में और अधिक बदलाव आएगा। उन्होंने कहा कि कैच द रेन, स्वच्छता अभियान और वृक्षारोपण जैसे पर्यावरण-स्वास्थ्य उन्मुख आयामों के द्वारा ग्रामीण क्षेत्र के कल्याण में वृद्धि होगी। हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि मनरेगा योजना के अंतर्गत लेबल बजट के हिसाब से मानवदिवस सृजन का लक्ष्य हासिल करके श्रमिकों को उनकी मांग के अनुसार काम और समय पर वेतन मिले, ताकि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को और अधिक जीवंत रखा जा सके।

