अहमदाबाद
‘साहित्यालोक’ गत छ: दशकों से गुजरात के साहित्य – प्रेमियों को काव्य- गोष्ठियों के द्वारा कविता की संजीवनी प्रदान करने वाली यशस्वी संस्था रही है। इसी क्रम में रविवार को सुबह 11:00 बजे ‘रिदम स्टूडियो‘, प्रह्लाद नगर, अहमदाबाद में संस्था के अध्यक्ष और ख्यातिलब्ध ग़ज़लकार डॉ. ऋषिपाल धीमान ‘ऋषि‘ की अध्यक्षता में एवं गुजराती के स्वनामधन्य कवि कृष्ण दवे की विशिष्ठ उपस्थिति में गुजराती-हिंदी के सुप्रसिद्ध हास्य कवि हरिवदन भट्ट द्वारा अनुवादित कुछ हिंदी-कवियों की गजलों के गुजराती अनुवाद की पुस्तक ‘समन्वय‘ का ‘साहित्यालोक‘ की एक भव्य और सफल काव्य- गोष्ठी में लोकार्पण सम्पन्न हुआ। इस काव्य – गोष्ठी का सफल संचालन किया वडोदरा से पधारे ग़ज़लकार एवं हास्य-व्यंग्यकार रितेश त्रिपाठी ने।मंचस्थ महानुभावों द्वारा दीप-प्रज्वलन, कवि नरपत वैतालिक की सरस्वती-वंदना, पुस्तक- विमोचन एवं विशिष्ठ महानुभावों के प्रतिभाव तथा पुस्तक के कवि के आत्मकथ्य के पश्चात् विधिवत काव्य-गोष्ठी की शुरुआत हुई। काव्य रसिक श्रोताओं की उपस्थित में 3 घंटे चली इस काव्य-गोष्ठी में कुल 20 शब्द-शिल्पियों ने काव्य -पाठ किया। काव्य -गोष्ठी में लगभग हर विषय पर और हर विधा में रचनाएँ सुनने को मिलीं। ग़ज़ल और गीत की विधा को भरपूर तालियाँ मिलीं। कुंडलियों, सवैयों और कुछ अछांदस रचनाओं की उपस्थिति को भी ख़ूब सराहा गया। श्रृंगाररस, वीर रस व हास्यरस काव्य -पाठ के मुख्य रस रहे। देशप्रेम, सामाजिक सरोकार एवं अध्यात्म से युक्त विषय भी रचनाकारों के प्रिय विषय थे। लगभग 3 घंटे चली काव्य- गोष्ठी में उपस्थिति मुख्य शब्द-शिल्पी थे। डॉ. ऋषिपाल धीमान ‘ऋषि‘, कृष्ण दवे, ओंकार अग्निहोत्री, चन्द्रमोहन तिवारी, रितेश त्रिपाठी (वडोदरा), हरिवदन भट्ट, दिनेश कुमार वशिष्ठ, हसन कमाल पठान ‘ जुगनू ‘, जितेंद्र सिंह चौहान ‘ पुष्प ‘, डॉ नरपत वैतालिक ‘ आशिया (गाँधीनगर) ‘, अशोक तिवारी, संजीव प्रभाकर ( गाँधीनगर), डॉ अविनाश पाठक, छत्रपाल वर्मा, सुभाष मित्तल, डॉ ॰ हिमांशु माथुर,अमृत जोशी, रजनी धीमान, सुदर्शिता शाह, पूनम जैन अग्रवाल आदि । कार्यक्रम के अध्यक्ष डॉ. ऋषि पाल ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में अनुवाद को पर काया प्रवेश की संज्ञा दी । कृष्ण दवे ने हरिवदन भट्ट को सरल -सहज व्यक्तित्व का धनी बताया और उनके साथ अपने सम्बन्धों को याद किया । कार्यक्रम में उपस्थित विज्ञ श्रोताओं में सुमन त्रिपाठी (वडोदरा), किरण पाठक, मीनाक्षी बेन भट्ट, आरती ( हरिवदन भट्ट जी की बेटी), हीना बेन, इनाक्क्षी शाह, राजेश जोशी, दर्शन भट्ट ( हरिवदन भट्ट के बेटे), पंकज भाई आदि की उपस्थिति भी उल्लेखनीय रही। अंत में गीतकार चन्द्रमोहन तिवारी जी ने संक्षिप्त रूप से धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कार्यक्रम का समापन किया । आतिथेय हरिवदन भट्ट ने सभी को मध्याह्न भोजन करवाया फिर सभी सदस्य एवं अतिथि यह कहते हुए घर की ओर प्रस्थान किए कि, कविता की संजीवनी,कवियों का उत्साह । काव्य-गोष्ठियों से बने, नई
काव्य की राह ।

