इसके लिए मेहनत और समर्पण जरूरी; छोटे कस्बों के छात्र भी ऊंचे पदों पर पहुंचे
पणजी। सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायधीशबीआर गवई ने शनिवार को कहा कि परीक्षा में अंक और रैंक यह तय नहीं करते कि छात्र कितना सफल होगा। उसको सफलता मेहनत, लगन और समर्पण से मिलती है। CJI गोवा के वीएम सालगांवकर लॉ कॉलेज के स्वर्ण जयंती समापन समारोह में बोल रहे थे।उन्होंने अपने छात्र जीवन के बारे में बताते हुए कहा कि वे कॉलेज में कम जाते थे, उनके दोस्त उपस्थिति लगाते थे। लेकिन फिर भी पुराने प्रश्नपत्र पढ़कर मेरिट लिस्ट में तीसरे स्थान पर आए। CJI ने कहा, मेरे बैच का टॉपर क्रिमिनल लॉयर बना, दूसरे नंबर पर आने वाला साथी हाईकोर्ट जज बना और मैं खुद भारत का मुख्य न्यायाधीश बना हूं। ये उदाहरण है कि रैंक से सफलता नहीं मिलती। जस्टिस गवई ने कहा कि देश में कानूनी शिक्षा को मजबूत करना जरूरी है और यह सुधार केवल नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसे विदेशी विश्वविद्यालयों में स्कॉलरशिप के माध्यम से आदिवासी छात्र पढ़ाई कर पाते हैं, वैसे ही भारत में भी सफल वकीलों को समाज से मिले सहयोग को लौटाते हुए नए छात्रों की मदद करनी चाहिए। उनका कहना था कि इस तरह से युवा वकील आगे चलकर न्याय प्रणाली को और सशक्त बना पाएंगे।

