स्वामी विवेकानंद से लेकर 9/11 तक, 11 सितंबर के ऐतिहासिक महत्व के साथ एक सुखद संयोग
नई दिल्ली
11 सितंबर का दिन, जो विश्वबंधुत्व के संदेश और उस पर हुए आतंकी हमले दोनों की याद दिलाता है, आज एक और विशेष व्यक्तित्व के 75वें जन्मदिन के रूप में मनाया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के परम पूजनीय सरसंघचालक श्री मोहन भागवत का आज जन्मदिन है। यह एक सुखद संयोग है कि इस वर्ष आरएसएस भी अपना शताब्दी वर्ष मना रहा है। मोहन भागवत जी का जीवन राष्ट्र को समर्पित रहा है। उन्होंने 1970 के दशक में एक प्रचारक के रूप में अपना कार्य शुरू किया, जब देश में आपातकाल लगा हुआ था। उस दौर में उन्होंने आपातकाल-विरोधी आंदोलन को मजबूत किया और महाराष्ट्र के ग्रामीण तथा पिछड़े इलाकों में काम किया। उन्होंने बिहार के गाँवों में भी समाज को सशक्त बनाने के लिए कई साल बिताए। उनकी कार्यशैली और नेतृत्व क्षमता ने उन्हें 2009 में सरसंघचालक का दायित्व दिलाया, जिसे वे आज भी पूरी ऊर्जा और समर्पण के साथ निभा रहे हैं। भागवत जी को युवाओं से जुड़ने की अद्भुत क्षमता के लिए जाना जाता है। उनके नेतृत्व में संघ में कई महत्वपूर्ण बदलाव हुए, जैसे कि गणवेश परिवर्तन और शिक्षा वर्गों में सुधार। कोरोना महामारी के दौरान उन्होंने स्वयंसेवकों को सुरक्षित रहकर समाज सेवा करने के लिए प्रेरित किया, जिससे लाखों जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाई जा सकी। उनका दृष्टिकोण ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ पर केंद्रित है। उन्होंने समाज को संगठित करने और समता-समरसता की भावना को सशक्त करने के लिए ‘पंच परिवर्तन’ का मार्ग सुझाया है, जिसमें सामाजिक समरसता, नागरिक शिष्टाचार और पर्यावरण जैसे सूत्र शामिल हैं। मृदुभाषी स्वभाव और दूसरों को सुनने की क्षमता उनकी नेतृत्व शैली की प्रमुख विशेषता है। वे संगीत और वाद्य यंत्रों में भी रुचि रखते हैं। स्वच्छ भारत मिशन और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसे जन-आंदोलनों में भी उन्होंने संघ परिवार को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित किया। कुछ ही दिनों में, विजयादशमी पर, आरएसएस 100 वर्ष का हो जाएगा। यह एक ऐतिहासिक अवसर है, और यह स्वयंसेवकों का सौभाग्य है कि उन्हें मोहन भागवत जैसे दूरदर्शी नेतृत्व का मार्गदर्शन मिल रहा है।

