नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारी संगठनों में 8वें वेतन आयोग के गठन और पुरानी पेंशन बहाली, यह मांग जोर पकड़ रही है। सरकार ने कहा था कि आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें पहली जनवरी 2026 से लागू कर दी जाएंगी, लेकिन अभी तक आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति भी नहीं हो सकी है। ऐसे में कर्मचारी संगठनों को यह चिंता सता रही है कि अब महज सौ दिन बचे हैं, इतने कम समय में किस तरह से आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होंगी। रक्षा असैन्य कर्मचारियों का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे बड़े ट्रेड यूनियनों में से एक, अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) ने 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (सीपीसी) की अधिसूचना में देरी के खिलाफ 14 अक्टूबर को अखिल भारतीय ‘विरोध दिवस’ मनाने की घोषणा की है। इसमें दूसरा एजेंडा ‘पुरानी पेंशन’ बहाली और तीसरा, रक्षा प्रतिष्ठानों में अनुकंपा नियुक्तियों से प्रतिबंध हटाना, शामिल रहेगा। अखिल भारतीय रक्षा कर्मचारी महासंघ (एआईडीईएफ) के महासचिव और स्टाफ साइड की जेसीएम के वरिष्ठ सदस्य सी. श्रीकुमार ने बताया कि कर्मचारी, अखिल भारतीय विरोध दिवस मनाने पर मजबूर हैं। केंद्र सरकार, कर्मियों की बात नहीं सुन रही। केंद्र सरकार के कर्मचारी, पेंशनभोगी और राज्य सरकार के कर्मचारी, 8वें वेतन आयोग के गठन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, लेकिन भारत सरकार चुप है। इससे सरकारी कर्मियों में व्यापक असंतोष फैल रहा है। कर्मचारियों का तर्क है कि जहां सांसदों और विधायकों को समय-समय पर वेतन संशोधन मिलता है, वहीं सरकारी कर्मचारी और पेंशनभोगी, बढ़ती मुद्रास्फीति और स्वास्थ्य सेवा एवं शिक्षा की बढ़ती लागत के बावजूद, एक दशक से भी अधिक समय से उचित संशोधन के बिना संघर्ष कर रहे हैं।

