इसका नुकसान आम अमेरिकी नागरिक भुगत रहे
वॉशिंगटन
तीन अमेरिकी सांसदों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के भारत पर लगाए भारी-भरकम टैरिफ को चुनौती दी है। ये सांसद हैं डेबोरा रॉस, मार्क वीजी और राजा कृष्णमूर्ति।इन्होंने अमेरिकी संसद में एक प्रस्ताव पेश किया है जिसका मकसद भारत से आने वाले सामान पर लगाए जाने 50% टैरिफ को हटाना है।सांसदों का कहना है कि ये टैरिफ गैर-कानूनी हैं। अमेरिका के लिए नुकसानदेह हैं और इसका सबसे ज्यादा नुकसान आम अमेरिकी नागरिकों को हो रहा है।डेबोरा रॉस ने कहा कि उनके राज्य नॉर्थ कैरोलिना में भारत से बहुत निवेश आता है, हजारों नौकरियां भारतीय कंपनियों से जुड़ी हैं, ये टैरिफ उस रिश्ते को चोट पहुंचा रहे हैं।मार्क वीजी ने इसे “आम अमेरिकियों पर अतिरिक्त टैक्स” बताया। उन्होंने कहा कि सामान महंगा हो जाने से आम लोगों की जेब पर बोझ पड़ रहा है।भारतीय मूल के सांसद राजा कृष्णमूर्ति ने कहा कि ये टैरिफ सप्लाई चेन को तोड़ रहे हैं, अमेरिकी मजदूरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं और उपभोक्ताओं के लिए कीमतें बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत से रिश्ते मजबूत करने चाहिए, बिगाड़ने नहीं।यह प्रस्ताव सिर्फ भारत के टैरिफ तक सीमित नहीं है। सांसदों का कहना है कि ट्रम्प लगातार अधिकारों का इस्तेमाल करके एकतरफा तरीके से टैरिफ लगा रहे हैं, जबकि व्यापार नियम बनाने का असली अधिकार अमेरिकी संसद के पास है।अमेरिका ने रूस पर दबाव बनाने के लिए भारत पर आर्थिक प्रतिबंध लगाए हैं। ट्रम्प कई बार यह दावा कर चुके हैं कि, भारत के तेल खरीद से मिलने वाले पैसे से रूस, यूक्रेन में जंग को बढ़ावा देता है।ट्रम्प प्रशासन रूस से तेल लेने पर भारत के खिलाफ की गई आर्थिक कार्रवाई को पैनल्टी या टैरिफ बताता रहा है।ट्रम्प भारत पर अब तक कुल 50 टैरिफ लगा चुके हैं। इसमें 25% रेसीप्रोकल यानी जैसे को तैसा टैरिफ और रूस से तेल खरीदने पर 25% पैनल्टी है। रेसीप्रोकल टैरिफ 7 अगस्त से और पेनल्टी 27 अगस्त से लागू हुआ।
ट्रम्प के गोल्ड कार्ड के खिलाफ 20 राज्यों का मुकदमा
अमेरिकी प्रशासन ने ट्रम्प गोल्ड कार्ड वीजा के आवेदनों पर 1 मिलियन डॉलर (करीब 9 करोड़ रुपए) की फीस लगा दी है। इस फैसले के खिलाफ कैलिफोर्निया के नेतृत्व में कुल 20 अमेरिकी राज्यों ने कोर्ट में मुकदमा दायर कर दिया है।इन राज्यों का कहना है कि यह फीस पूरी तरह गैर-कानूनी है और इससे अस्पतालों, स्कूलों, यूनिवर्सिटी और सरकारी सेवाओं में पहले से चल रही डॉक्टरों-शिक्षकों की कमी और गंभीर हो जाएगी।कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने कहा, “ये वीजा डॉक्टर, नर्स, इंजीनियर, वैज्ञानिक और शिक्षक जैसे उच्च कुशल प्रोफेशनल्स के लिए होता है। दुनियाभर का टैलेंट जब अमेरिका आता है तो पूरा देश आगे बढ़ता है।कैलिफोर्निया के साथ न्यूयॉर्क, इलिनॉय, वॉशिंगटन, मैसाचुसेट्स समेत 20 बड़े राज्य इस मुकदमे में शामिल हैं।

