इस्लामाबाद।
पाकिस्तानी हुक्मरानों के खिलाफ आवाम में नाराजगी है। आए दिन धमाकों और बिगड़ते आर्थिक हालात समेत सियासी घमासान का देश पर नकारात्मक असर पड़ रहा है। यही वजह है कि विरोधी खेमा लामबंद हो सत्ता को चुनौती पेश करने को आतुर दिख रहा है और इसकी तपिश महसूस की जाने लगी है। विपक्षी दलों के गठबंधन तहरीक तहफुज आईन-ए- पाकिस्तान (टीटीएपी) ने मौजूदा सरकार की असफलताओं की फेहरिस्त बना घोषणा की है कि वो इस मनमानी का मिलकर जवाब देंगे। दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन (नेशनल कंसल्टेटिव कॉन्फ्रेंस) के बाद जारी घोषणा-पत्र में, विपक्ष ने 8 फरवरी 2026 को ‘ब्लैक डे’ (यौम-ए-सियाह) मनाने का फैसला किया है, जो 2024 के आम चुनावों में कथित धांधली की दूसरी वर्षगांठ होगी। स्थानीय मीडिया ने इसे रिपोर्ट किया है। डॉन के अनुसार, इस दिन पूरे देश में चक्का जाम और शटर डाउन हड़ताल का ऐलान किया गया, साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर विरोध प्रदर्शन और ब्लैक डे मनाने की अपील की गई। टीटीएपी, जिसमें पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई), पश्तूनख्वा मिल्ली अवामी पार्टी (पीकेमैप) और अन्य विपक्षी दल शामिल हैं, ने सम्मेलन में मांग की कि निष्पक्ष चुनाव कराए जाएं, मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) की स्वतंत्र नियुक्ति हो, और सत्ता का सुचारु हस्तांतरण सुनिश्चित किया जाए।

