डोभाल नहीं गए अमेरिका, रुबियो से नहीं हुई कोई मुलाकात
नई दिल्ली
अमेरिका के साथ ट्रेड डील और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दावों के बीच तेल खरीद को लेकर मोदी सरकार का बड़ा बयान सामने आया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने गुरुवार को साफ किया कि भारत की ऊर्जा सुरक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। तेल आयात से जुड़े फैसले पूरी तरह राष्ट्रीय हित और बदलती वैश्विक परिस्थितियों को ध्यान में रखकर किए जाते हैं।MEA प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि सरकार कई बार सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट कर चुकी है कि 1.4 अरब भारतीयों की ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करना सर्वोपरि है। बाजार की परिस्थितियों और उभरते अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य के अनुरूप ऊर्जा स्रोतों में विविधता लाना भारत की रणनीति का केंद्र है। उन्होंने दोहराया कि भारत के सभी फैसले इसी सोच के तहत लिए गए हैं और आगे भी लिए जाते रहेंगे।विदेश मंत्रालय की यह टिप्पणी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस दावे के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक व्यापक व्यापार समझौते के तहत रूसी तेल की खरीद रोकने पर सहमति जताई है। भारत अमेरिका और संभवतः वेनेजुएला से तेल आयात बढ़ा सकता है। हालांकि भारत ने सार्वजनिक रूप से ऐसी किसी भी प्रतिबद्धता की पुष्टि नहीं की है। विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को ब्लूमबर्ग की उस खबर का खंडन किया, जिसमें दावा किया गया था कि राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने दोनों देशों के बीच तनाव कम करने के लिए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत करने के लिए वाशिंगटन का दौरा किया था।विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में इस रिपोर्ट को गलत बताया। उन्होंने कहा कि इस खबर में कोई सच्चाई नहीं है। जायसवाल ने साफ कहा, “इस रिपोर्ट का कोई आधार नहीं है। ऐसी कोई बैठक या ऐसा कोई दौरा नहीं हुआ है।”ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, अजीत डोभाल अमेरिका गए थे ताकि यह संदेश दे सकें कि भारत द्विपक्षीय रिश्तों में आए तनाव को पीछे छोड़कर व्यापार समझौते पर बातचीत फिर से शुरू करना चाहता है।

