मुंबई। तलाक के एक मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने कहा है कि पति से शारीरिक संबंध बनाने से इनकार करना और उस पर विवाहेतर संबंध का संदेह करना तलाक का आधार है। इसके साथ ही हाई कोर्ट ने पारिवारिक अदालत के आदेश को चुनौती देने वाली महिला को राहत देने से इनकार कर दिया है। बता दें कि पारिवारिक अदालत ने मामले में पति की तलाक याचिका को स्वीकार कर लिया था। बॉम्बे हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और न्यायमूर्ति नीला गोखले की खंडपीठ ने गुरुवार को यह टिप्पणी की। पीठ ने कहा कि महिला के आचरण को उसके पति के प्रति ‘क्रूरता’ माना जा सकता है। जिसके बाद महिला ने पारिवारिक अदालत के आदेश के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया था। इसमें महिला ने मांग की थी कि पारिवारिक अदालत का आदेश खारिज किया जाए। साथ ही महिला ने अदालत से पति को उसे एक लाख रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का निर्देश देने की भी मांग की थी।

