देश की दिशा भी यहीं से तय होगी
नई दिल्ली
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नई दिल्ली में बुधवार को कर्तव्य भवन का उद्घाटन किया. लोकार्पण के बाद जनता को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि कर्तव्य सिर्फ एक इमारत का नाम भर नहीं है, यह करोड़ों देशवासियों के सपनों को साकार करने की तपोभूमि है. पीएम मोदी ने कहा, “ये केवल कुछ नए भवन और सामान्य इंफ्रास्ट्रक्चर नहीं हैं. अमृतकाल में इन्हीं भवनों में विकसित भारत की नीतियां बनेंगी, विकसित भारत के महत्वपूर्ण निर्णय होंगे और राष्ट्र की दिशा तय होगी. मैं आप सभी को कर्तव्य पथ भवन की बहुत-बहुत बधाई देता हूं. मैं इसके निर्माण से जुड़े सभी इंजीनियरों और श्रमिक साथियों का भी इस मंच से धन्यवाद करता हूं.”पीएम मोदी ने कहा, “कर्तव्य भवन विकसित भारत की नीतियों और दिशा का मार्गदर्शन करेगा. इससे पहले अलग-अलग मंत्रालयों के किराए पर 1500 करोड़ रुपए खर्च हो रहे थे. हमने बहुत मंथन के बाद कर्तव्य भवन नाम दिया है. कर्तव्य पथ, कर्तव्य भवन हमारे लोकतंत्र की, हमारे संविधान की मूल भावना का उद्घोष करते हैं. देश का कोई भी हिस्सा आज विकास की धारा से अछूता नहीं है.”पीएम मोदी ने कहा, “हमें फाइलों को लेकर अपने नजरिए को बदलने की जरूरत है. एक फाइल, एक शिकायत… ये देखने में रोजमर्रा का काम लग सकता है, लेकिन किसी के लिए वही एक कागज उनकी उम्मीद हो सकती है. एक फाइल से कितने ही लोगों का जीवन जुड़ा हो सकता है.”
कर्तव्य भवन-03 2019 में शुरू हुई सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट का हिस्सा है और कॉमन सेंट्रल सेक्रेटरिएट (CSS) की 10 में से पहली बिल्डिंग है।कर्तव्य भवन-03 का उद्घाटन सबसे पहले किया गया है। इसे दिल्ली के अलग-अलग जगहों पर स्थित विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को एक साथ लाकर उनके बीच बेहतर कोआर्डिनेशन और कामों में तेजी लाने के लिए डिजाइन किया गया है।इसमें ग्राउंड फ्लोर सहित 7 फ्लोर हैं। यहां गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, MSME मंत्रालय, कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DOPT), पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय, प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार (PSA) और इंटेलिजेंस ब्यूरो के ऑफिस होंगे।कर्तव्य भवन 1.5 लाख वर्ग मीटर में फैला है। यहां एक साथ 600 कारें खड़ी हो सकती हैं। इसमें क्रेच (शिशुगृह), योग रूम, मेडिकल रूम, कैफे, किचन और हॉल है। कर्तव्य भवन में 24 कॉन्फ्रेंस रूम भी हैं। हर रूम 45 लोगों के बैठने की क्षमता है।सरकार के अनुसार, अभी कई मंत्रालय 1950 और 1970 के दशक के बीच बने शास्त्री भवन, कृषि भवन, उद्योग भवन और निर्माण भवन जैसी पुरानी इमारतों में काम कर रहे हैं, जो अब संरचनात्मक रूप से जर्जर हो चुकी हैं।
PM मोदी एससीओ सम्मेलन में हिस्सा लेने चीन जाएंगे
चीन जाने से पहले पीएम 30 अगस्त को जापान पहुंचेंगे
भारत ने एससीओ में तुर्की और अज़रबैजान की मौजूदगी पर चिंता जताई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की बैठक में शामिल होने के लिए चीन जाएंगे। यह दौरा 31 अगस्त और 1 सितंबर को होगा। पीएम मोदी की 2020 में गलवां घाटी में भारत-चीन सैन्य झड़प के बाद पहली चीन यात्रा होगी। 2020 में गलवां घाटी में हुई झड़प के बाद यह उनकी पहली चीन यात्रा होगी। उन्होंने पिछली बार 2019 में चीन का दौरा किया था। चीन जाने से पहले पीएम मोदी 30 अगस्त को जापान दौरा पर पहुंचेंगे। यहां वो भारत-जापान शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।एससीओ सदस्य देशों के साथ चर्चा में क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और व्यापार पर चर्चा होगी। भारत-चीन संबंधों में स्थिरता और संवाद बहाल करने के प्रयास किए जाएंगे। शिखर सम्मेलन के दौरान रूसी राष्ट्रपति पुतिन और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ अनौपचारिक मुलाकात की संभावना है। हालांकि पीएम मोदी की जापान और चीन की यात्रा के बारे में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।इससे पहले अक्तूबर 2024 में प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग कज़ान में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में मुलाकात हुई थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच सीमा तनाव कम करने के प्रयासों में तेजी आई। वहीं पिछले महीने विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन का दौरा किया था, जहां उन्होंने राष्ट्रपति शी जिनपिंग और विदेश मंत्री वांग यी से मुलाकात की। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मुलाकात ने मोदी की चीन यात्रा का रोडमैप तैयार किया था।
ऑपरेशन सिंदूर में पाकिस्तान को जिस तरह से मुंह की खानी पड़ी शायद ही वो कभी इसे भूल पाएगा। इस जंग के बाद भारत कूटनीतिक मोर्चे भी बेहद एक्टिव नजर आ रहा। यही वजह है कि भारत ने SCO समिट यानी शंघाई सहयोग संगठन की आगामी बैठक में तुर्की और अजरबैजान की उपस्थिति पर आपत्ति जता दी है। यह बैठक चीन के तियानजिन शहर में होने वाली है। भारत ने बैठक से पहले ही SCO में डायलॉग पार्टनर्स तुर्की और अजरबैजान की मौजूदगी पर सवाल उठाए हैं। इस मुद्दे को चीन के सामने भी उठाया है। SCO शिखर सम्मेलन से पहले भारत ने मेजबान चीन को अपनी आपत्तियों से अवगत करा दिया है। चूंकि एससीओ आम सहमति से काम करता है, इसलिए किसी एक सदस्य की ओर से किसी मुद्दे पर आपत्ति निर्णायक कारक हो सकती है। भारत को तुर्की और अजरबैजान के पाकिस्तान के साथ संबंधों पर आपत्ति है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान तुर्की और अजरबैजान ने पाकिस्तान का समर्थन किया था। भारत ने इस बारे में चीन से बात की है।

