भावनगर
भावनगर के निकट कोलियाक गांव के निकट एक प्रसिद्ध आस्था स्थल, समुद्र में विराजमान निष्कलंक महादेव, पांडवों की कथा से जुड़ा है। पांडवों के निष्कलंक होने की घटना, महाभारत युद्ध में अपने ही परिवार का वध आदि, इस निष्कलंक महादेव तीर्थ में स्थित है। यहाँ भक्तगण निरंतर पाँच शिवलिंगों के दर्शन और पूजन का लाभ प्राप्त करते रहते हैं। भावनगर के निकट समुद्र में विराजमान निष्कलंक महादेव लिंग, ज्वार-भाटे के अनुसार सहजता से दर्शन का लाभ प्राप्त करते रहते हैं। तलापडी भाषा में नकलंग महादेव के नाम से विख्यात यह निष्कलंक महादेव लोगों के हृदय में विराजमान हैं। श्रावण और भादरवा मास में बड़ी संख्या में भक्त पितरों की पूजा के लिए आते हैं। ऋषि पंचमी के दिन यहाँ स्नान के लिए महिलाओं का तांता लगा रहता है। श्रावण मास के अंतिम दिन, अर्थात् अमावस्या को, यहाँ एक विशाल सार्वजनिक मेला लगता है, जिसमें लाखों तीर्थयात्री और भक्तगण पूर्व रात्रि से ही कोलियाक सागर के तट पर पहुँच जाते हैं। समुद्र के बीचों-बीच ज्वार-भाटे के साथ दिखाई देने वाले शिवलिंग अद्भुत दृश्य उत्पन्न करते हैं। श्रद्धालुओं के लिए प्रसिद्ध यह स्थल पूरे देश के लिए आस्था और आकर्षण का स्रोत रहा है।

