गांधीनगर। गुजरात में वर्ष 2007 में शुरू हुई 108 आपातकालीन सेवा को अब 18 साल पूरे हो गए हैं, शुरुआत में नगण्य एम्बुलेंस थीं, जिनमें धीरे-धीरे वृद्धि हुई है। डेढ़ दशक में आपातकालीन कॉल का निष्कर्ष यह निकला है कि, कुल 179.30 लाख आपातकालीन मामले दर्ज किए गए हैं। जिनमें से केवल प्रसूता को अचानक पीड़ा हुई हो ऐसे मामले 59 प्रतिशत हैं। बाकी 67 प्रतिशत विभिन्न 19 प्रकार की बीमारियों के मामले हैं। गर्भधारण को अभी नौ महीने पूरे न हुए हों और प्रसूता को अचानक असहनीय पीड़ा होने पर अस्पताल पहुंचाना पड़े, यह हर वर्ग की महिलाओं में सामान्य हो गया है। सैकड़ों मामलों में तो महिला अस्पताल पहुंचने से पहले ही एम्बुलेंस में डिलीवरी होती है और सड़क पर 108 वैन उस बच्चे का जन्मस्थान बनती है। राजकोट में तो एक महिला सरकारी अस्पताल पहुंची और मैदान में ही बच्चे का जन्म हो गया था। यह दर्शाता है कि 108 सेवा में महिला डॉक्टर या जिन्हें स्त्री रोग का अनुभव हो उनका उपस्थित होना आवश्यक है। इस मुद्दे पर शोध करने की आवश्यकता है।गर्भवती महिलाओं के बाद आपातकालीन सेवा के लिए सबसे अधिक कॉल वाहन दुर्घटना में चोट के 22 लाख मामले सामने आए हैं। इसके अलावा, अन्य दुर्घटनाओं में 18 लाख, पेट दर्द के 19.27 लाख और श्वास लेने में तकलीफ के 10.44 लाख मामले आए थे। इसके अलावा, गुजरात में सबसे अधिक चिंताजनक हृदय रोग से संबंधित 8.81 लाख आपातकालीन कॉल आए थे, जिसकी संख्या वर्तमान में बहुत बढ़ गई है।

