वंदे मातरम् गीत राष्ट्र के पुन: निर्माण का आह्वान:नड्डा
नई दिल्ली (वी.एन.झा)। संसद के शीतकालीन सत्र के नौवें दिन लोकसभा सदन में ई-सिगरेट पीने का विवाद चर्चा में रहा। भाजपा सांसद अनुराग ठाकुर ने स्पीकर ओम बिरला को शिकायत करते हुए कहा- TMC सांसद सदन में ई-सिगरेट पी रहे हैं। इस पर स्पीकर ने कहा कि एक्शन लिया जाएगा।इसके बाद संसद परिसर में मीडिया से बातचीत में TMC सांसद सौगत रॉय ने कहा- केंद्रीय मंत्री की बात छोड़िए, हम सदन परिसर में ई-सिगरेट पी सकते हैं। बिल्डिंग के अंदर सिगरेट नहीं पी सकते, लेकिन बाहर पी सकते हैं।इधर विपक्ष के सवाल पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी पेंट की जेब हाथ डाले हुए ही जबाव दे रहे थे। इस पर स्पीकर बिरला ने उन्हें टोका और कहा कि माननीय सांसद जेब से हाथ निकालकर जबाव दें। इस पर हरदीप सिंह पुरी ने तत्काल हाथ बाहर निकाले। केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा- वंदे मातरम् गीत राष्ट्र के पुन: निर्माण का आह्वान है। वंदे मातरम् एक मंत्र, ऊर्चा, प्रण, संकल्प है। ये मां भारती की साधना, सेवा और आराधना है। इससे जो भाव पैदा होते हैं। उसे शब्दों में बांधना बहुत कठिन है। ये आजादी का जज्बा देता है। आजादी के संघर्ष की याद भी दिलाता है। जब 1875 में ब्रिटिश हम पर अपना राष्ट्रगान थोपना चाहते थे। तब बंकिम चंद्र चटोपाध्याय ने वंदे मातरम् गीत हमको दिया। 1882 में आनंदमठ में उन्होंने इस जोड़ा। नड्डा ने कहा- जो सम्मान, स्थान वंदे मातरम् को मिलना चाहिए था, वो नहीं मिला, इसके लिए तब के शासक जिम्मेदार हैं। देश जब तकलीफ में आया तो विपक्ष को इसकी भी जिम्मेदारी लेनी चाहिए।वंदे मातरम् को जो सम्मान मिलना चाहिए था, वह कभी नहीं मिला, और उस समय देश के नेता इसके लिए जिम्मेदार थे। नड्डा ने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा हर चीज को कबूल किया और कंप्रोमाइज किया है। वक्फ भी इसी का हिस्सा है। बॉम्बे प्रेसिडेंसी का विभाजन कर दिया। मुस्लिम लीग ने इसकी मांग की थी। बाकी लोग नहीं चाहते थे कि ये बंटे। 1947 में मुस्लिम लीग ने वंदे मारतम् का विरोध किया। कांग्रेस ने कबूल किया, अपने रेजोल्यूशन में। जिन्ना ने दो देश की बात कही। 1947 में कांग्रेस ने भारत को खंडित आजादी दिलाई।

