- एप्पलवुड्स विला, शेला अहमदाबाद में नौ दिन तक बही रामचरितमानस की अमृतवर्षा
- पूज्य संत मुरलीधर जी महाराज ने अपने श्रीमुख से भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन मूल्यों, धर्म, नीति और भक्ति के गूढ़ रहस्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला
अहमदाबाद
‘फिट इंडिया’ और ‘हर घर स्वदेशी’ जैसे सार्थक संदेशों के बीच, अहमदाबाद की धरा पर आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार करने वाली नव दिवसीय भव्य “श्रीराम कथा” का आज सोमवार को पूज्य संत मुरलीधर जी महाराज के पावन श्रीमुख से एप्पलवुड्स विला, शेला के सुरम्य वातावरण में भावपूर्ण और मंगलमय समापन हुआ। यह कथा 7 दिसम्बर को प्रारंभ हुई थी और नौ दिनों तक रामचरितमानस की अमृतवर्षा करती रही। कथा के अंतिम दिवस पर, कथा पंडाल में आस्था और श्रद्धा का अभूतपूर्व संगम देखने को मिला। दूर-दराज से आए श्रद्धालुओं की अपार भीड़ उमड़ी, जो रामकथा के अंतिम क्षणों को अपने हृदय में संजो लेने के लिए आतुर थी। कथा व्यास पीठ से महाराज मुरलीधर जी ने अपने ओजस्वी और मधुर प्रवचनों के माध्यम से राम कथा के सार, आदर्श जीवन मूल्यों, धर्म, नीति और भक्ति के गूढ़ रहस्यों पर विस्तार से प्रकाश डाला। महाराज ने बताया कि किस प्रकार भगवान श्रीराम का जीवन प्रत्येक मनुष्य के लिए प्रेरणा का स्रोत है और कैसे उनके आदर्शों का पालन कर हम जीवन को सफल बना सकते हैं। समापन के अवसर पर प्रस्तुत भजन-कीर्तन और राम नाम संकीर्तन ने पूरे वातावरण को भक्तिभाव से ओत-प्रोत कर दिया, जिससे कई भक्तों की आँखें नम हो गईं। इस भव्य ‘श्रीराम कथा’ के सफल आयोजन से न केवल एप्पलवुड्स विला, शेला का परिसर, बल्कि पूरा अहमदाबाद शहर और उसके आस-पास का क्षेत्र भी भक्ति के रंग में सराबोर हो गया। कथा के उपरांत प्रसाद वितरण किया गया और सभी भक्तों ने श्रद्धापूर्वक व्यास पीठ की वंदना कर पुण्य लाभ प्राप्त किया। यह आयोजन आने वाले कई दिनों तक भक्तों के मन में राम भक्ति की प्रेरणा को जाग्रत रखेगा। अंतिम दिन श्रीराम के राज्याभिषेक और आगे के प्रसंगों की प्रस्तुति दी गई। यह नौ दिवसीय कथा शहर और राज्य के लिए एक अविस्मरणीय आध्यात्मिक अनुभव बन गई है। इससे पहले अष्टम दिवस पर महाराजश्री ने मानस की सर्वाधिक मार्मिक प्रसंगों में से एक, श्रीराम-भरत मिलाप का वर्णन किया। अयोध्या की राजगद्दी को छोड़कर, नंगे पैर भगवान श्रीराम को मनाने चित्रकूट पहुंचे भरत के त्याग, प्रेम और अटूट निष्ठा को महाराजश्री ने जिस भावपूर्ण तरीके से प्रस्तुत किया, उससे पंडाल में उपस्थित हर श्रोता की आँखें नम हो गईं।

