दिसंबर में पोष अमावस्या पड़ती है, जिसका सनातन धर्म में विशेष महत्व माना जाता है ,यह अमावस्या पितरों के तर्पण और श्राद्ध आदि कार्यों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है ,कई लोग इस दिन पितृ दोष और कालसर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए इस दिन उपवास भी रखते हैं, इस दिन पवित्र नदी जल से या कुंड आदि में स्नान करने का भी विशेष महत्व माना जाता है।
कब पड़ रही है पोष अमावस्या ?
दिसंबर में अमावस्या 19 तारीख को है, पोषअमावस्या का प्रारंभ 19 दिसंबर को सुबह 5:00 से होगा और समापन 20 दिसंबर की सुबह 7:12 पर होगा ।
पोष अमावस्या का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार पोष अमावस्या के दिन व्रत रखने से न केवल पितरों की आत्मा को शांति मिलती है बल्कि समस्त देवी देवताओं की भी विशेष कृपा प्राप्त होती है ।इस दिन नदी मे स्नान करके दान पुण्य.काम करने और पितृ तर्पण करने वालों को कई शुभ फलों की प्राप्ति होती है। अमावस्या के दिन शनि देव के मंदिर जाकर शनि देव को सरसों का तेल, काले उड़द , काले तिल ,लोहा ,काला कपड़ा,और नीला पुष्प अर्पित करने से शनि देव की हमेशा कृपा बनी रहती है । अमावस्या के दिन चंद्रमा से जुड़ी वस्तुएं जैसे दूध ,और चावल का दान करने से नाराज पितृ भी खुश होते हैं, और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है।
पोष अमावस्या पर क्या-क्या करना चाहिए
पोष अमावस्या के दिन व्रत जरूर रखना चाहिए ।
पूर्वजों को याद करके दान करें किसी ब्राह्मण को भोजन कराएं
इस दिन पवित्र नदी जल से या किसी कुंड आदि में स्नान जरूर करें।
इस दिन सूर्य देव को अर्ध्य जरूर दें।
अर्ध्य देने के पात्र में शुद्ध जल, लाल चंदन ,और लाल रंग के पुष्प अवश्य डालें ।
इस दिन जरूरतमंदों को दान जरूर दें।
अमावस्या के दिन सुबह शाम घर के मंदिर में और तुलसी के नीचे दीपक जरूर जल इससे घर से दरिद्रता दूर रहती है और सुख शांति आती है ।
अमावस्या के दिन तुलसी के पत्ते या बेलपत्र गलती से भी ना तोड़े ।
इस दिन पीपल के पेड़ के नीचे सरसों के तेल का दिया जलाएं जिससे पितृ और देवता प्रसन्न हो ।
-पूनम अग्निहोत्री

