- विशिष्ट अतिथि पुरुषोत्तम शर्मा की उपस्थिति में कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. आलोक गुप्ता ने की, संपत लोहार ने काव्यधारा के माध्यम से प्रारंभित उद् बोधन दिया, संस्था का परिचय डॉ. ऋषिपाल धीमान ने दिया

अहमदाबाद । 1967 में स्थापित गुजरात की पहली हिन्दी संस्था ‘साहित्यालोक’ का वार्षिक पुरस्कार तथा सम्मान समारोह रविवार को शहर के न्यू राणिप क्षेत्र के श्री दिग्विजयलक्षी उच्चतर माध्यमिक हिन्दी विद्य़ालय के सभागार में एक गरीमापूर्ण माहौल में आयोजित किया गया। समारोह की अध्यक्षता प्रोफेसर आलोक गुप्ता ने की जबकि कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि थे पुरुषोत्तम शर्मा। कार्यक्रम का संचालन करते हुए संपत लोहार ने कार्यक्रम में पधारे अतिथियों का स्वागत करते हुए संक्षिप्त परिचय देते हुए हिन्दी प्रेमी श्रोताओं का भी स्वागत किया। दीपक पंचौली, डॉ. मीरा रामनिवास, डॉ. ऋषिपाल धीमान, मंजू महिमा, रजनी धीमान, संपत लोहार, डॉ. प्रणव भारती, डॉ. चंद्रमोहन तिवारी का दुपट्टा पहनाकर स्वागत किया गया। इसके पश्चात् साहित्यालोक के अध्यक्ष डॉ. ऋषिपाल धीमान ने संस्था के बारे में संस्था एवं अतिथियों के बारे में संक्षिप्त परिचय दिया। तत्पश्चात दीप प्रज्जवलन के बाद कार्यक्रम की विधिवत शुरूआत हुई। सर्वप्रथम दिनेश वशिष्ठ ने सरस्वती वंदना की। इसके बाद डॉ. प्रभा मंजूमदार को वाग्देवी पुरस्कार, डॉ. अशोक तिवारी को कविवर रामचेत वर्मा गौरव पुरस्कार, आनंद सिद्धार्थ को मोती देवी लोहार स्मृति पुरस्कार के रुप में शाल, सम्मानपत्र और स्मृति चिह्न देकर पुरस्कृत किया गया। इसके अलावा सम्मान अंलकरण से गुजरात वैभव के निदेशक मोहित विदेह की अनुपस्थिति में दीपक पंचौली और जगदीश बाजपेयी ने श्रीमती गीतादेवी काबला शारस्वत सम्मान स्वरुप शॉल, सम्मानपत्र और स्मृति चिह्न ग्रहण किया। इसके अलावा डॉ. मीरा राम निवास को साहित्यालोक अलंकार सम्मान से विभूषित किया गया। समारोह के दौरान कवयित्री रजनी धीमान द्वारा लिखित पुस्तक ‘मेरे सैनिक तुझे सलाम’ तथा कवयित्री मंजू महिमा द्वारा लिखे उपन्नास ‘कौड़ियों और कंचे’ का विमोचन किया गया। इस दोनों पुस्तकों की समीक्षा क्रमशः संस्था के महासचिव चंद्रमोहन तिवारी और डॉ. प्रणव भारती द्वारा की गई। पुस्तकों की लेखिकाओं ने पुस्तकों के बारे में अपने विचार साझा किये। कार्यक्रम को डॉ. मीरा रामनिवास, पुरुषोत्तम शर्मा, प्रो. आलोक गुप्त, ने संबोधित किया। कार्यक्रम के दौरान पुरुषोत्तम शर्मा, सुश्री दर्शिता शाह, ओंकार अग्निहोत्री, संपत लोहार, हरिवदन भट्ट, आनंद सिद्धार्थ का कार्यक्रम में सहयोग देने के लिए भामाशाह सम्मान दिया गया। अंत में ऋतेश त्रिपाठी ने धन्यवाद व्यक्त किया।



