- 36 साल बाद गुजरात हाई कोर्ट का फैसला
अहमदाबाद । 5 मई, 1989 को बंद हुई ‘आर्योदय स्पिनिंग मिल’ के 3228 श्रमिकों को आज 36 साल के लंबे इंतजार के बाद उनका मुआवजा देने का आदेश गुजरात हाई कोर्ट की जस्टिस मोना भट्ट ने दिया है। विडंबना यह है कि इन 36 वर्षों में मिल के 60 प्रतिशत से अधिक श्रमिकों का निधन हो चुका है। अब यह राशि उनके परिजनों (वारिसों) को चुकाई जाएगी। श्रमिकों को उनकी ग्रेच्युटी, छंटनी का मुआवजा (Retrenchment) और बकाया वेतन दिया जाएगा। मामले से जुड़े वकीलों के अनुसार, साढ़े तीन दशक के विलंब के कारण उन्हें ब्याज का भुगतान भी किया जाएगा।
हाई कोर्ट ने लिक्विडेटर को फंड वितरित करने का निर्देश दिया है। सुरक्षित लेनदार (Secured Creditor) के रूप में भारतीय स्टेट बैंक (SBI) को भी 9.33 करोड़ रुपये चुकाने का आदेश दिया गया है। मिल की 56,000 वर्ग मीटर जमीन का सौदा हाल ही में (24 अक्टूबर 2025) 82 करोड़ रुपये में हुआ है। इस राशि के आने के बाद अब श्रमिकों के लगभग 27 करोड़ रुपये के बकाया भुगतान का रास्ता साफ हो गया है।

