गांधीनगर
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘टीबी मुक्त भारत अभियान’ के अंतर्गत गुजरात ने क्षय रोग नियंत्रण में मिसाल कायम की है। राज्य सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा लागू किए गए नए उपचार प्रोटोकॉल और गहन निगरानी के चलते टीबी मृत्यु दर में ऐतिहासिक कमी आई है। आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015 की तुलना में 2023 तक नए टीबी मामलों में 34 प्रतिशत और मृत्यु दर में 37 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई है। हाल ही में राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत ने राजभवन में वरिष्ठ स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ इन कार्यक्रमों की विस्तृत समीक्षा की और राज्य की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। राज्यपाल ने बैठक में जोर दिया कि टीबी मुक्त गुजरात के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इसे एक ‘जन आंदोलन’ बनाना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि समय पर उपचार और पर्याप्त पोषण हर मरीज तक पहुँचना चाहिए। वर्ष 2023 में राज्य के 1.42 लाख पंजीकृत मरीजों में से 1.32 लाख मरीज पूरी तरह स्वस्थ हुए हैं। इस सफलता के पीछे राज्य का नया ‘फॉलो-अप प्रोटोकॉल’ है, जिसमें मरीजों को हाई-रिस्क और लो-रिस्क श्रेणियों में विभाजित कर विशेष उपचार दिया जा रहा है। वर्ष 2025 में अक्टूबर तक मृत्यु का आंकड़ा घटकर 3,516 रह गया है, जो सुधार की निरंतरता को दर्शाता है। वर्तमान में गुजरात में 2,351 निशुल्क माइक्रोस्कोपी केंद्र और 400 से अधिक आधुनिक ट्रुनेट (TrueNat) व सीबीएनएएटी (CBNAAT) मशीनें कार्यरत हैं। मरीजों को आर्थिक संबल देने के लिए ‘निक्षय पोषण योजना’ के तहत सीधे बैंक खातों (DBT) में सहायता भेजी जा रही है, जिसमें अकेले वर्ष 2025 में अब तक 46.30 करोड़ रुपये वितरित किए गए हैं।
इसके अतिरिक्त, 29,734 निक्षय मित्र मरीजों को पोषण किट मुहैया करा रहे हैं। राज्यपाल ने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से गुजरात जल्द ही टीबी मुक्त होकर देश के लिए एक रोल मॉडल बनेगा।

