केंद्र सरकार हर तीन महीने में रिपोर्ट दे, हम निगरानी करेंगे
नई दिल्ली
सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि स्कूलों में सैनिटरी नैपकिन और लड़कियों के लिए अलग टॉयलेट न होने के कारण उनकी पढ़ाई नहीं छूटनी चाहिए। कोर्ट ने केंद्र सरकार से 30 जनवरी के कोर्ट के फैसले को पूरी तरह लागू कराने को कहा।इस फैसले में कोर्ट ने स्कूलों में लड़कियों को फ्री सैनेटरी नैपकिन देने को कहा था। कोर्ट ने कहा कि वह मामले की प्रगति की निगरानी हर तीन महीने में करेगा। केंद्र को हर तीन महीने पर प्रोग्रेस रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अर्चना पाठक दवे से कहा, इस फैसले का अच्छा उपयोग कीजिए।केंद्र सरकार ने कोर्ट को बताया कि 30 जनवरी के फैसले के बाद सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में इस दिशा में प्रयास तेज हुए हैं। कोर्ट ने कहा कि फैसले का लाभ ज्यादा से ज्यादा छात्राओं तक पहुंचना सुनिश्चित किया जाए।बेंच ने पूछा कि क्या सभी राज्यों से नियमित डेटा जुटाया जा रहा है। केंद्र ने बताया कि पिछले लगभग दो से ढाई महीने का डेटा एकत्र किया गया है। अदालत ने कहा कि केंद्र आगे भी राज्यों का मार्गदर्शन करे और समय-समय पर अनुपालन की जानकारी जुटाए।इसी बीच एक वकील ने अंतरिम आवेदन का जिक्र करते हुए कहा कि फैसले में इस्तेमाल किया गया “ऑक्सो-बायोडिग्रेडेबल” सैनिटरी नैपकिन शब्द पर्यावरण के लिए नुकसानदेह हो सकता है। अदालत ने वकील से यह मुद्दा केंद्र सरकार के वकील के सामने रखने को कहा।मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।

