यह हमारा आंतरिक मसला, तिब्बत मुद्दे में बाहरी दखल मंजूर नहीं
बीजिंग
चीन ने भारत को दलाई लामा के उत्तराधिकार के मुद्दे से दूर रहने की सलाह दी है। बीजिंग ने कहा कि दलाई लामा के पुनर्जन्म और उत्तराधिकारी तय करने की प्रक्रिया पूरी तरह चीन का आंतरिक मामला है और इसमें किसी बाहरी हस्तक्षेप की अनुमति नहीं दी जाएगी।भारत में चीनी दूतावास की प्रवक्ता यू जिंग ने रविवार को बयान जारी कर कहा कि दलाई लामा का पुनर्जन्म सदियों पुराने धार्मिक रीति-रिवाजों और ऐतिहासिक परंपराओं के तहत होता है।चीन का यह बयान ऐसे समय आया है जब 27 मई को भारत के धर्मशाला में सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) यानी निर्वासित तिब्बती सरकार के प्रमुख पेनपा त्सेरिंग दूसरी बार शपथ लेने वाले हैं। दलाई लामा भी इस कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं।चीनी दूतावास ने भारत को तिब्बत पर अपने पुराने रुख की याद भी दिलाई। बयान में कहा गया कि भारत को तिब्बती स्वतंत्रता से जुड़ी गतिविधियों के लिए मंच उपलब्ध नहीं कराना चाहिए। यह क्षेत्रीय स्थिरता और भारत-चीन संबंधों के लिए जरूरी है। सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) के नए राजनीतिक प्रमुख पेनपा त्सेरिंग की जीत ने चीन की चिंता बढ़ा दी है। बीजिंग को डर है कि भारत में मौजूद निर्वासित तिब्बती नेतृत्व भविष्य में उसकी मंजूरी के बिना नए दलाई लामा की घोषणा कर सकता है।पेनपा त्सेरिंग ने फरवरी में हुए चुनाव में 61% से ज्यादा वोट हासिल किए थे। नियमों के मुताबिक, 60% से अधिक वोट मिलने पर उम्मीदवार सीधे विजेता घोषित हो जाता है। इसलिए उन्हें दूसरे दौर के मतदान की जरूरत नहीं पड़ी।

