अहमदाबाद । उत्तर मध्यकाल के कवि श्रीधर पाठक की कुछ काव्य – पंक्तियाँ याद आ रही हैं :“ जेठ के दारुण आतप से , तप के जगती – तल जावे जला । नभ – मंडल छाया मरुस्थल – सा , दल बाँध के अंधड़ आवे चला । जल हीन जलाशय व्याकुल हैं , पशु – पक्षी प्रचंड है , भानुकला , किसी कानन कुंज के धाम में प्यारे , चलो विश्राम करो तो भला । जेठ के दारुण ताप का मुँह चिढ़ाते हुए , मरुस्थल में मरुद्यान – सी और किसी भटके हुए राही के लिए मंज़िल – सी वडोदरा निवासी सुप्रसिद्ध हास्य व्यंग्य कवि ॠतेश त्रिपाठी के निवास – स्थान पर आयोजित ‘साहित्यालोक ‘ की काव्य – गोष्ठी में अहमदाबाद और वडोदरा के शब्दशिल्पियों ने ऐसी काव्य वर्षा की कि जीवन के सभी मुरझाए फूल पुनः खिल उठे । काव्यानंद से भरपूर इस कार्यक्रम के अध्यक्ष थे , ‘ साहित्यालोक ‘ के अध्यक्ष और ख्यातिलब्ध ग़ज़लकार डॉ. ऋषिपाल धीमान तथा मुख्य अतिथि का पद सुशोभित कर रहे थे । “ जयंतोर्मि संस्था “ के अध्यक्ष तथा साहित्यकार हरीश शाह ने संचालन का कार्यभार सँभाला । सुप्रसिद्ध ग़ज़लकार एवं हास्य- व्यंग्य कवि ऋतेश त्रिपाठी ने । सर्वप्रथम संस्था के महामंत्री चन्द्रमोहन तिवारी ने गणमान्य आगंतुकों का संक्षिप्त परिचय देते हुए संस्था की तरफ़ से हार्दिक स्वागत किया । तत्पश्चात् माँ शारदे का माल्यार्पण हुआ । सुप्रसिद्ध कवयित्री मालिनी पाठक ने सरस्वती वंदना करके माँ शारदे से कार्यक्रम के लिए आशीर्वाद प्राप्त किया। लगभग 3 घंटे चली इस काव्य-गोष्ठी में गीत, ग़ज़ल, मुक्तक , अछांदस आदि सभी तरह की काव्य – विधाओं का समावेश रहा । इस रसमयी काव्य-गोष्ठी में भाग लेने वाले कवि थे। डॉ. ऋषि पाल धीमान , हरीश शाह,चन्द्रमोहन तिवारी, हरिवदन भट्ट, ॠतेश त्रिपाठी, विजय प्रताप सिंह, डॉ.अविनाश पाठक, किशोर शाक्य, आनंद सिद्धार्थ, आलोक गुंजन, धर्मेश पगी, राजेश ब्रह्मभट्ट ,डॉ प्रणय वाघेला, अरविंद मिश्र, अशोक नागर, अंकित मेहता, तारक मेहता, मालिनी पाठक, रजनी धीमान एवं नमिता सिंह । कवयित्री दर्शिता शाह जो इस काव्य-गोष्ठी में उपस्थित नहीं हो पाईं थीं , उनकी रचना का पाठ किया – सुमन त्रिपाठी ने अंत में काव्य-गोष्ठी के अध्यक्ष डॉ.ॠषिपाल धीमान ने अपना अध्यक्षीय वक्तव्य दिया । काव्य-गोष्ठी में शांति देवी त्रिपाठी, जयदीप चौहान एवं मनस्वी त्रिपाठी । तत्पश्चात् संस्था के गोष्ठी मंत्री एवं हास्य – व्यंग्य कवि हरिवदन भट्टजी ने धन्यवाद ज्ञापन किया ।

